बगीचा में गौरव पथ टेंडर में गड़बड़ी का आरोप,ठेकेदार ने की उच्च स्तरीय जाँच की मांग

बगीचा में गौरव पथ टेंडर में गड़बड़ी का आरोप,ठेकेदार ने की उच्च स्तरीय जाँच की मांग

बगीचा में गौरव पथ टेंडर में गड़बड़ी का आरोप, ठेकेदार ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

बगीचा। नगर पंचायत बगीचा में प्रस्तावित लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत वाले गौरव पथ निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ठेकेदार विकास कुमार जायसवाल ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक को पत्र भेजकर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

शिकायत पत्र के अनुसार, प्रारंभिक निविदा में प्री-क्वालिफिकेशन (PQ) शर्तों को लेकर कई विसंगतियां थीं। बाद में बिना स्पष्ट कारण बताए निविदा को निरस्त कर दिया गया और नई शर्तों के साथ पुनः टेंडर जारी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शर्तों में बदलाव किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गौरव पथ निर्माण कार्य सामान्यतः नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा ही कराया जाता है और पिछले वर्षों में ऐसे कार्यों की संख्या सीमित रही है। ऐसे में निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो रहा है।

ठेकेदार ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि नगरीय प्रशासन मंत्री, विभागीय सचिव तथा जशपुर कलेक्टर को भी भेजी गई है।

       10 करोड़ के नगर पंचायत बगीचा में गौरव पथ निर्माण के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया विवादों में घिरती नजर आ रही है। एक स्थानीय ठेकेदार ने विभाग को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और PQ शर्तों में संशोधन से पारदर्शिता प्रभावित हुई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि पहले जारी टेंडर को अचानक निरस्त कर दिया गया और बाद में नई शर्तों के साथ पुनः निविदा जारी की गई। इससे प्रतिस्पर्धी ठेकेदारों को नुकसान पहुंचा और कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा मिलने की आशंका बनी है।

मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों का पालन हुआ है या नहीं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि शिकायत के बाद विभाग क्या कदम उठाता है और जांच होती है या नहीं।