साहीडांड में दशई करम की धूम, आदिवासी परंपरा और संस्कृति के रंग में रंगा समाज
साहीडांड में दशई करम की धूम, आदिवासी परंपरा और संस्कृति के रंग में रंगा समाज
भगत उरांव समाज ने विधि-विधान से की करमा पूजा, रातभर गूंजे पारंपरिक लोकनृत्य और गीत
समाज की एकजुटता का दिखा परिचय
साहीडांड। ग्राम पंचायत साहीडांड में भगत उरांव समाज के संरक्षक एवं मार्गदर्शक श्री विश्वनाथ प्रधान के नेतृत्व में दशई करम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी सिंह, मंडल अध्यक्ष हरिश कुमार आरिक एवं शक्ति केंद्र प्रभारी महावीर यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विधि-विधान से हुई करमा पूजा,
रातभर चला सांस्कृतिक कार्यक्रम
दशई करम के अवसर पर समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करमा पूजा संपन्न कराई गई। पूजा के दौरान समाज की महिलाओं ने दिनभर उपवास रखकर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। इसके बाद बैगा द्वारा करमा की पारंपरिक कथा सुनाई गई। कथा श्रवण एवं पूजा-अर्चना के पश्चात महिलाओं ने अपना व्रत खोला।
पूजा संपन्न होने के बाद रातभर पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों का दौर चलता रहा। पूरे आयोजन में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का उत्साह देखने को मिला। समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित किया।
एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का दिया संदेश
भगत उरांव समाज के इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से समाज के लोग शामिल हुए। आयोजन के माध्यम से सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल लोगों ने समाज की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक एकरूपता को प्रदर्शित किया।
समाज के प्रमुखों ने ऐसे आयोजनों को नई पीढ़ी तक अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
इस अवसर पर समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मान्यताओं के संरक्षण पर जोर दिया। आयोजन ने धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित किया।





















