जशपुर की काजू का मिठास अब झारखंड,उड़ीसा उत्तरप्रदेश और दिल्ली तक लगेगा,,काजू की उत्पादन से किसानों ने बनाया आय का उत्तम साधन
विशेष लेख
काजू उत्पादन को किसानों ने बनाया आय का उत्तम साधन
7800 किसान काजू की खेती से सीधे जुड़े
जशपुर काजू गुणवत्ता और मिठास के कारण अन्य जिलों के साथ झारखंड, उड़िसा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक डिमांड
जशपुर 28 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में किसानों को सेब, नाशपाती,काजू, स्ट्राबेरी, आदि अन्य खेती के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जशपुर में जिला प्रशासन उद्यान विभाग रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयास से जिले के लगभग 7800 किसान 7800 एकड़ खेत में काजू की अच्छी फसल ले रहे हैं।
सभी किसान अपने एक एक एकड़ के खेत में काजू की अच्छी फसल ले रहे हैं
जशपुर की काजू की डिमांड छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश, उड़िसा, दिल्ली आदि अन्य राज्यों में निरंतर बनी रहती है। गुणवत्ता और मिठास के मामले में भी जशपुर की काजू के क्या कहने इसी कारण इसकी ज्यादा मांग मार्केट में बनी हुई है।
उल्लेखनीय काजू एक लाभदायक नगदी फसल है
ग्राफ्टेड पौधे जल्दी फल देते हैं और उत्पादन अधिक होता है। रोपण विधि
वर्षा ऋतु में पौध रोपण करना अच्छा रहता है।
पौधों के बीच लगभग 7–8 मीटर दूरी रखें।
गड्ढे में गोबर खाद और मिट्टी मिलाकर पौधा लगाएँ।
सिंचाई और देखभाल
शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई आवश्यक होती है।
खरपतवार नियंत्रण और समय-समय पर छंटाई करना चाहिए
पौधे 3–4 वर्ष बाद फल देना शुरू करते हैं।
पूर्ण उत्पादन 8–10 वर्ष में मिलता है।
एक विकसित पेड़ से 8–15 किलोग्राम तक काजू प्राप्त हो सकता है। काजू का उपयोग
मिठाई, नमकीन और ड्राई फ्रूट में उपयोग किया जाता है।
काजू के छिलके से औद्योगिक तेल बनाया जाता है। निर्यात से किसानों को अच्छा लाभ मिलता है।
सहायक संचालक जनसंपर्क जशपुर श्रीमती नूतन सिदार








