स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त टीम ने मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना का आयोजित कार्यशाला मे बच्चों मे होने वाली टाइप-1 मधुमेह की समय पर पहचान व प्रभावी प्रबंधन पर यूनिसेफ विशेषज्ञों ने दी जानकारी

स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त टीम ने मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना का आयोजित  कार्यशाला मे बच्चों मे होने वाली टाइप-1 मधुमेह की समय पर पहचान व प्रभावी प्रबंधन पर यूनिसेफ विशेषज्ञों ने दी जानकारी

*मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में टाइप-1 डायबिटीज पर कार्यशाला आयोजित*

*बच्चों में होने वाली टाइप-1 मधुमेह की समय पर पहचान व प्रभावी प्रबंधन पर यूनिसेफ विशेषज्ञों ने दी जानकारी*

जशपुरनगर, 25 फरवरी 2026/ मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना के अंतर्गत टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित बच्चों एवं उनके परिजनों के लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में जिला चिकित्सालय में आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य किशोरावस्था से पूर्व बच्चों में बढ़ रहे टाइप-1 मधुमेह के मामलों, समय पर पहचान के अभाव तथा पालकों में जागरूकता की कमी के कारण होने वाली असामयिक मृत्यु को रोकना था। इस अवसर पर यूनिसेफ मुख्यालय न्यूयॉर्क से आए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दल मिस्टर राउल बरमेजो, मिस डेवॉन कुएने तथा मिस मारियाना बेनाविड्स एली लिली एवं कंपनी यू.एस.ए. के द्वारा टाइप-1 डायबिटीज के प्रभावी प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। 

    विशेषज्ञों ने बताया कि यद्यपि टाइप-1 मधुमेह की उचित प्रबंधन के माध्यम से रोगी सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने इंसुलिन थेरेपी, नियमित एवं दैनिक ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, योग एवं व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समय-समय पर चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त शर्करा का स्तर अत्यधिक कम हो जाने पर ग्लूकोज टैबलेट अथवा टॉफी के माध्यम से तत्काल रक्त शर्करा को सामान्य स्तर तक लाने की जानकारी भी दी गई।

     मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना का प्रमुख उद्देश्य टाइप-1 मधुमेह से ग्रसित बच्चों की शीघ्र जांच एवं पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराना, आरोग्य दर में सुधार लाना तथा स्वस्थ जीवनशैली केंद्रों के माध्यम से परामर्श एवं सहयोग प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त मधुमेह संबंधी जटिलताओं की रोकथाम, चिकित्सकों द्वारा नियमित फॉलोअप, तथा परिवार के सदस्यों को इंसुलिन देने का प्रशिक्षण प्रदान करना भी योजना के प्रमुख घटक हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले एवं प्रदेश में बाल मधुमेह से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी तथा आमजन में टाइप-1 मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। कार्यशाला के आयोजन में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. विवेक विरेंद्र सिंह, सुश्री अन्नपूर्णा कौल एवं सुश्री राधिका श्रीवास्तव ने न्यूयॉर्क से आए विशेषज्ञों और उपस्थित अभिभावकों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. उदय प्रकाश भगत, डॉ. अभिषेक निकुंज, डॉ. जानकी भगत शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ. अरविंद रात्रे सहायक नोडल अधिकारी, श्री देवेंद्र राठौर, जिला सलाहकार डॉ. रूपा प्रधान, श्री जगत चक्रेश सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। कार्यशाला के अंत में उपस्थित सभी बाल मधुमेह रोगियों के अभिभावकों को ग्लूकोमीटर एवं ग्लूकोस्ट्रिप का वितरण किया गया, ताकि वे घर पर ही नियमित रूप से बच्चों की रक्त शर्करा की जांच कर सकें और समय पर आवश्यक कदम उठा सकें।