रीति-रिवाज और संस्कृति की विरासत बचाने एकजुट हुआ भगत उरांव समाज”
साहीडांड में गूंजेगा कर्मा का उल्लास, 24 अक्टूबर को होगा भव्य सामूहिक आयोजन
सरना स्थल पर जुटे समाज के प्रतिनिधि, रीति-रिवाज और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर हुआ मंथन
साहीडांड। ग्राम पंचायत साहीडांड स्थित भगत उरांव समाज के सरना स्थल में आगामी कर्मा त्यौहार के आयोजन को लेकर समाज के प्रतिनिधियों एवं क्षेत्रभर के समाज प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में समाज की एकजुटता, पारंपरिक रीति-रिवाज, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रखने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
24 अक्टूबर को होगा भव्य सामूहिक कर्मा आयोजन
बैठक में निर्णय लिया गया कि 24 अक्टूबर को आदिवासी भगत उरांव समाज द्वारा सरना स्थल साहीडांड में वार्षिक कर्मा त्यौहार का वृहद एवं सामूहिक आयोजन किया जाएगा। सामूहिक कर्मा पूजा के माध्यम से समाज के लोगों को अपनी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों में भी समाज को जागरूक करने तथा पारंपरिक संस्कृति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कर्मा पर्व मनाया जाएगा।
पूर्वजों की परंपरा और संस्कृति को बचाने पर जोर
बैठक में समाज की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक रीति-रिवाज और संस्कारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में समाज से अलग हुए कुछ परिवारों के पुनः अपने मूल सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ने के विषय पर भी चर्चा हुई। इसे लेकर घरवापसी कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही समाज में एकजुटता बनाए रखने और सामाजिक सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया।
समाज को एकजुट रखने का लिया संकल्प
बैठक में समाज के लोगों से अपनी सामाजिक परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया गया। समाज को भ्रमित करने वाले प्रयासों से सतर्क रहने तथा आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत बनाए रखने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में समाज के अध्यक्ष बिमल राम भगत, उपाध्यक्ष बसंत राम भगत, समाज के बैगा सिबल राम, संरक्षक विश्वनाथ प्रधान सहित विभिन्न गांवों के समाज प्रमुख सोनसाय राम भगत, राजकुमार भगत, नेहरू भगत, दिलीप भगत और नवल भगत उपस्थित रहे।
अंत में सभी समाज प्रतिनिधियों ने सामाजिक रीति-रिवाज, संस्कार एवं आदिवासी संस्कृति को जीवंत रखने और आने वाली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने का संकल्प लिया।ये गांव होंगे सम्मिलित गायलूंगा लोटाडांड,कलिया,घाटतरी, सिहारडांड, नारायणुपर, चिटकवाईन, बरडांड।





















