बादल खोल अभ्यारण्य के जंगलों में भैंसों का जमावड़ा, छोटे पेड़-पौधों पर चल रही कुल्हाड़ी!

बादल खोल अभ्यारण्य के जंगलों में भैंसों का जमावड़ा, छोटे पेड़-पौधों पर चल रही कुल्हाड़ी!

बादल खोल अभ्यारण्य के जंगलों में भैंसों का जमावड़ा, छोटे पेड़-पौधों पर चल रही कुल्हाड़ी!

बाहर से लाकर जंगलों में छोड़े जा रहे भैंसों के झुंड, वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के आरोप; वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठे सवाल

शिकायत के बाद ही हरकत में आता है वन विभाग? ग्रामीणों में नाराजगी, जंगलों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

साहीडांड/बगीचा। जशपुर जिले के बादल खोल अभ्यारण्य के सरबकोम्बो सर्कल जंगलों में इन दिनों कई स्थानों पर भैंसों के झुंड विचरण करते और चरते हुए देखे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाहर से भैंसों को लाकर जंगलों में चराने की गतिविधियां जारी हैं। जंगलों के भीतर कथित रूप से अवैध चरागाह बनाए जाने और छोटे-छोटे पेड़-पौधों की कटाई किए जाने से वन संपदा को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ गई है।

वनों की सुरक्षा और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के उद्देश्य से संरक्षित क्षेत्रों में निगरानी और नियमित गश्ती व्यवस्था बेहद जरूरी है। ऐसे में बादल खोल अभ्यारण्य के जंगलों में भैंसों के झुंडों की मौजूदगी और छोटे पेड़-पौधों की कथित कटाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छोटे पेड़-पौधों को काटकर भैंसों को खिलाने का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगलों में भैंसों को चराने के साथ-साथ उनके मालिकों द्वारा छोटे-छोटे पेड़-पौधों को काटकर भैंसों को खिलाया जाता है। यदि इन गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो जंगलों में प्राकृतिक रूप से विकसित हो रहे पौधों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे वन क्षेत्र के प्राकृतिक पुनर्जनन और पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

जंगल केवल बड़े पेड़ों से ही नहीं, बल्कि छोटे पौधों, झाड़ियों और समूची जैव विविधता से मिलकर बनते हैं। ऐसे में छोटे पौधों की कटाई और जंगलों में अनियंत्रित चराई की गतिविधियों की जांच करना आवश्यक है।

वन विभाग की गश्ती व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में नियमित गश्ती और निगरानी प्रभावी ढंग से होनी चाहिए, लेकिन भैंसों के झुंडों की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई नजर नहीं आने से लोगों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि जब तक वन विभाग को शिकायत या सूचना नहीं दी जाती, तब तक जंगलों में विभागीय अमले की सक्रियता दिखाई नहीं देती।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित वन अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। इसके बावजूद जंगलों में लगातार ऐसी गतिविधियां होने की शिकायतें वन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

जंगलों की सुरक्षा

 के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी

 खोल अभ्यारण्य जैसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्र में अवैध चराई और पेड़-पौधों की कटाई की शिकायतों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। वन विभाग को संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर भैंसों के झुंडों की मौजूदगी, चराई की स्थिति और पौधों की कटाई की जांच करनी चाहिए।

साथ ही, नियमित गश्ती बढ़ाने, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करने और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

अब सवाल यह है कि जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग इन शिकायतों पर कब सक्रिय होगा? क्या बादल खोल अभ्यारण्य के जंगलों में कथित अवैध चराई और छोटे पेड़-पौधों की कटाई पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, या वन संपदा को नुकसान पहुंचाने 

 गतिविधियां इसी तरह जारी रहेंगी? इन सवालों के जवाब अब वन विभाग की कार्रवाई से ही मिलेंगे।

सरबकोम्बो सर्कल प्रभारी से इस सम्बंध में जानकारी के लिए फोन लगाने पर फोन नही उठाया गया।वहीं सर्कल के अन्य कर्मचारी से बात करने पर अधिकारी के साथ भैंसों को भगाने के लिए सोंच रहे हैँ हमारे अधिकारी आएंगे तो कल से भगाने जाने की बात कही गयी।