*तेंदू पत्ता शाखकर्तन एवं अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित,वैज्ञानिक शाखकर्तन एवं वनाग्नि रोकथाम की दी गयी जानकारी*

*तेंदू पत्ता शाखकर्तन एवं अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित,वैज्ञानिक शाखकर्तन एवं वनाग्नि रोकथाम की दी गयी जानकारी*

*तेंदूपत्ता शाखकर्तन एवं अग्नि सुरक्षा पर कार्यशाला आयोजित*

*वैज्ञानिक शाखकर्तन एवं वनाग्नि रोकथाम की दी गई जानकारी*

*वन संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के संतुलन पर दिया गया विशेष जोर*

जशपुरनगर, 19 फरवरी 2026/ तपकरा परिक्षेत्र स्थित रेस्टहाउस में तेंदूपत्ता शाखकर्तन तथा वर्तमान अग्नि सीजन को दृष्टिगत रखते हुए अग्नि सुरक्षा विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीणों, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को तेंदूपत्ता के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित शाखकर्तन की विधि तथा वनाग्नि की रोकथाम के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रबंधकों एवं विभागीय अधिकारियों ने तेंदूपत्ता संग्रहण की महत्ता, वन संरक्षण तथा ग्रामीणों की आजीविका के मध्य संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

     कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व संसदीय सचिव श्री भारत साय एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में जनपद पंचायत फरसाबहार की अध्यक्ष श्रीमती हेमंती साय, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती दुलारी सिंह, जनपद सदस्य श्रीमती दुर्गावती नायक, तपकरा सरपंच श्रीमती सविता जायसवाल, श्री दिलीप कुमार साहू, श्री कपिल सिंह, श्री अजय शर्मा एवं श्री नटवर मूंदड़ा उपस्थित रहे। इसके अलावा वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, परिक्षेत्र अधिकारी, उप प्रबंधक, वनरक्षक, फंडमुंशी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्य अतिथि श्री भारत साय ने अपने संबोधन में कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीणों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। यदि इसका वैज्ञानिक पद्धति से शाखकर्तन एवं संग्रहण किया जाए तो वन संरक्षण और रोजगार दोनों का संतुलन बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने वनाग्नि की रोकथाम में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत आवश्यक बताते हुए सभी से सजग रहने की अपील की।

     कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रशिक्षु आईएफएस सुश्री यशस्वी मौर्य ने तेंदूपत्ता शाखकर्तन की वैज्ञानिक तकनीकों, शाखा काटते समय पौधों को क्षति से बचाने की सावधानियों, निर्धारित समय-सीमा के पालन तथा गुणवत्तापूर्ण संग्रहण की प्रक्रिया की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही उन्होंने वर्तमान अग्नि सीजन को ध्यान में रखते हुए जंगल में आग लगने के प्रमुख कारणों, उससे होने वाले पारिस्थितिक एवं आर्थिक नुकसान तथा आग से बचाव के व्यावहारिक उपायों से ग्रामीणों को अवगत कराया।

उप प्रबंध संचालक श्री शैलेंद्र कुमार अंबष्ट एवं उप वनमंडलाधिकारी श्री आशीष कुमार आर्य ने तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्य को निर्धारित समयावधि एवं मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप करने पर बल दिया तथा वनाग्नि की रोकथाम के लिए सामूहिक सहभागिता को आवश्यक बताया। कार्यशाला में उपस्थित सभी ग्रामीणों एवं सदस्यों से अपील की गई कि वे शाखकर्तन के दौरान किसी भी प्रकार से आग का उपयोग न करें, सूखे पत्तों या कचरे में आग लगाने से बचें तथा किसी भी संदिग्ध अग्नि घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते आग पर नियंत्रण कर वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।