22 किलोमीटर का सफर बन जाता है 50 किलोमीटर: गायलूंगा, कलिया और बुटंगा के ग्रामीण आज भी सड़क के लिए तरस रहे

22 किलोमीटर का सफर बन जाता है 50 किलोमीटर: गायलूंगा, कलिया और बुटंगा के ग्रामीण आज भी सड़क के लिए तरस रहे

22 किलोमीटर का सफर बन जाता है 50 किलोमीटर: गायलूंगा, कलिया और बुटंगा के ग्रामीण आज भी सड़क के लिए तरस रहे

बरसात में कट जाता है संपर्क, जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर ग्रामीण

बगीचा-  जशपुर जिले के गायलूंगा, कलिया और बुटंगा ग्राम पंचायतों के ग्रामीण आज भी बदहाल सड़क और पुल-पुलियों की समस्या से जूझ रहे हैं। बरसात शुरू होते ही इन गांवों का जिला मुख्यालय, तहसील और थाना से संपर्क लगभग टूट जाता है। सामान्य दिनों में 22 किलोमीटर का सफर बारिश के मौसम में 50 किलोमीटर से भी अधिक का हो जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों और अधिकारियों से सड़क एवं पुल-पुलियों के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। हर चुनाव में विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही ये वादे भी धुंधले पड़ जाते हैं।

गायलूंगा के सरपंच हीरालाल प्रधान बताते हैं कि बरसात के दिनों में वे अपनी कार में हमेशा एक कुदाली (फावड़ा) लेकर चलते हैं। इसका कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि जंगल के रास्तों में सड़क इतनी खराब हो जाती है कि कई बार खुद मिट्टी हटाकर या रास्ता बनाकर आगे बढ़ना पड़ता है। यही वजह है कि कुदाली उनके वाहन का स्थायी हिस्सा बन चुकी है उन्होंने आगे कहा कि हर चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के नेता विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सब कुछ भुला दिया जाता है। श्री प्रधान ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इन गांवों का हर मौसम में सड़क से नहीं जुड़ पाना बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।

ग्रामीणों के अनुसार, जब भी परिवार का कोई सदस्य इलाज, सरकारी काम या किसी अन्य जरूरी कारण से जिला मुख्यालय या तहसील जाता है, तब तक घर वाले उसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार करते रहते हैं। खराब सड़कें और जोखिम भरा सफर यहां के लोगों की रोजमर्रा की मजबूरी बन चुका है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि गायलूंगा, कलिया और बुटंगा ग्राम पंचायतों को सर्व मौसम सड़क और आवश्यक पुल-पुलियों की सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।