दुलदुला की महिला किसानों ने रचा सफलता का नया अध्याय, पहली बार गेंदा फूल की खेती से दीपावली पर कमाए ....
सफलता की कहानी
हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना से महिला किसानों को मिली नई सौगात
दुलदुला में पहली बार शुरू हुई गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती
दीपावली पर पहली तुड़ाई से कोरबा में ₹8 हजार के फूलों की बिक्री
जशपुरनगर 8 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में किसानों को खेती के नए एवं लाभकारी विकल्पों से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना के अंतर्गत दुलदुला क्षेत्र की महिला किसानों ने पहली बार गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती शुरू कर सफलता की नई राह खोली है।
हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना के तहत जिला प्रशासन के सहयोग एवं सीएसओ हर्षा ट्रस्ट के सहयोग से जनपद पंचायत दुलदुला क्षेत्र में महिला किसानों को आजीविका संवर्धन से जोड़ने के लिए यह अभिनव पहल की गई है।
इसके माध्यम से महिला किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक एवं लाभकारी कृषि गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
दीपावली पर्व के अवसर पर 5 नवंबर 2026 को महिला किसानों द्वारा उत्पादित गेंदा फूलों की पहली तुड़ाई की गई।
इसके बाद फूलों को बिक्री के लिए कोरबा भेजा गया, जहां महिला किसानों को कुल 8 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। दुलदुला क्षेत्र में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर गेंदा फूल का उत्पादन एवं विपणन महिला किसानों के लिए उत्साहजनक उपलब्धि साबित हुआ है।
पारंपरिक खेती के साथ बढ़ेंगे आय के नए अवसर
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए साधनों से जोड़ना, उनकी आय में वृद्धि करना तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर विकसित करना है। गेंदा फूल की खेती से महिला किसान त्योहारों एवं बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगी।
हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना के माध्यम से जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पहल से क्षेत्र की अन्य महिला किसानों को भी व्यावसायिक फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
यह पहल महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का सकारात्मक उदाहरण बन रही है।
आने वाले समय में इससे जशपुर जिले में व्यावसायिक फूलों की खेती को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।





















