गजरथ यात्रा 2026 का आगाज़: जशपुर में हाथी-मानव सहअस्तित्व की नई पहल, छात्रों को मिलेगा जंगल और वन्यजीव संरक्षण का ज्ञान
गजरथ यात्रा 2026 का आगाज़: जशपुर में हाथी-मानव सहअस्तित्व की नई पहल, छात्रों को मिलेगा जंगल और वन्यजीव संरक्षण का ज्ञान
जशपुर- मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने और नई पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से जशपुर वनमंडल ने "गजरथ यात्रा 2026" का शुभारंभ किया। अभियान की शुरुआत वन परिक्षेत्र तपकरा के ग्राम केरसई स्थित पूर्व माध्यमिक शाला से हुई, जहां विद्यार्थियों को हाथियों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास और सुरक्षित सहअस्तित्व के बारे में रोचक एवं वैज्ञानिक जानकारी दी गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गजरथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को हाथियों की गतिविधियों, भ्रमण मार्ग और सावधानियों से अवगत कराना है, ताकि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके। कार्यक्रम में बच्चों को चित्रों, संवाद और प्रस्तुति के माध्यम से हाथियों के जीवन, जंगल के महत्व और जैव विविधता संरक्षण की जानकारी दी गई।
इस वर्ष गजरथ यात्रा जशपुर वनमंडल के विभिन्न हाथी प्रभावित येलो जोन क्षेत्रों में पहुंचेगी। अभियान के तहत विद्यार्थियों को हाथियों की उपस्थिति के संकेत पहचानने, सामूहिक सुरक्षा उपाय अपनाने, वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा हाथियों की गतिविधियों की सूचना तत्काल वन विभाग को देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वन विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय समुदाय विशेषकर बच्चे और युवा हाथियों के स्वभाव और उनके प्राकृतिक व्यवहार को समझेंगे, तो मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा। इसी सोच के साथ गजरथ यात्रा को जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम बनाया गया है।
वनमंडलाधिकारी ने बताया कि आगामी दिनों में यह अभियान जिले के संवेदनशील क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों और गांवों तक पहुंचेगा, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलेगी।








